क्या कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी पर गिर सकता है?
जब हम अंतरिक्ष की बात करते हैं, तो हमारे मन में सबसे पहले यही आता है कि वहां क्या है और कैसे काम किया जाता है। लेकिन कम ही लोग यह सोचते हैं कि वहां भेजे गए उपग्रह और यंत्र वापस धरती पर कैसे आते हैं। कृत्रिम उपग्रहों का पृथ्वी पर गिरना एक गंभीर चिंता का विषय है। यह लेख इस तथ्य पर प्रकाश डालता है कि उपग्रह कैसे वापस आते हैं और क्या परिणाम हो सकते हैं।
उपग्रह का पुन: प्रस्थान और उसका प्रभाव
जब भी कोई उपग्रह अपनी निर्धारित अवधि समाप्त कर लेता है, तो उसे वापस पृथ्वी की ओर खींचा जाता है। इस प्रक्रिया को पुन: प्रस्थान या रि-एंट्री कहा जाता है। जब उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वह अत्यधिक घर्षण का सामना करता है। इस घर्षण की वजह से उपग्रह गर्म हो जाता है और अधिकांश समय वह आग में बदल जाता है। हालांकि, इसके कुछ बड़े टुकड़े बच सकते हैं और धरती पर गिर सकते हैं।
अंतरिक्ष मलबे का खतरा
अंतरिक्ष मलबे का खतरा भी बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में लगभग 7,700 उपग्रह पृथ्वी की नजदीकी कक्षा में परिक्रमा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 तक यह संख्या सैकड़ों हजारों तक पहुंच सकती है। यह मलबा विभिन्न अंतरिक्ष मिशनों के दौरान टूटे हुए उपग्रहों और रॉकेटों का हिस्सा होता है। अगर इसे नियंत्रित न किया गया तो भविष्य में यह एक बड़ा खतरा बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रयास और चुनौतियां
संयुक्त राष्ट्र इस समस्या से निपटने के लिए कई प्रयास कर रहा है। उनकी मुख्य चिंता यही है कि कैसे अंतरिक्ष मलबे को नियंत्रित किया जाए। लेकिन वर्तमान में विभिन्न देशों का अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रति सोने की धधक की तरह रूख ने इस समस्या को और भी जटिल बना दिया है। भारत और रूस जैसी देशों का चंद्रमा मिशन भी इस मलबे के बढ़ने में योगदान दे सकता है।
क्या हो सकता है समाधान?
अंतरिक्ष में मलबे को नियंत्रित करने के लिए कुछ संभावित उपाय किए जा सकते हैं। एक तरीका यह हो सकता है कि उपग्रहों को जमीन पर सुरक्षित तरीके से लाया जाए। दूसरी उपाए के रूप में ऐसे उपकरणों का निर्माण किया जा सकता है जो अंतरिक्ष मलबे को पकड़ सकें और उसे नष्ट कर सकें। जब तक इन उपायों को नहीं अपनाया जाएगा तब तक यह कठिनाई बनी रहेगी।
अंतरिक्ष अन्वेषण के इस युग में, जरूरत है कि हम इस मलबे के बारे में जागरूक हों और इसे नियंत्रण में लाने के लिए मिलजुल कर काम करें। इस लेख के माध्यम से हम इन सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे आप इस विषय को नई नजरों से देख सकें।
टिप्पणि
Prachi Doshi
कभी-कभी लगता है अंतरिक्ष में जो भी भेजा जाता है, वो वापस आने के लिए तैयार ही नहीं होता। बस भूल जाते हैं।
जुलाई 26, 2024 at 12:41
Karan Kacha
अरे भाई, ये सब बातें तो सुनी हैं, लेकिन जब तक हम अपने अंतरिक्ष मिशनों को एक नियमित, वैज्ञानिक, और पर्यावरण-अनुकूल ढांचे में नहीं डालेंगे, तब तक हम बस एक बड़ी धूम्रपान की तरह हैं-जो खुद को नष्ट कर रहा है! उपग्रह गिरते हैं, टुकड़े बिखरते हैं, और हम बस फोन पर वीडियो देखते रह जाते हैं! ये बस एक टेक्नोलॉजी की समस्या नहीं, ये तो एक नैतिक असफलता है! क्या हम सच में सोचते हैं कि अंतरिक्ष को हमारी कचरा डंपिंग ग्राउंड बनाना ठीक है? नहीं! ये तो हमारे बच्चों के भविष्य को चोरी करना है!
जुलाई 26, 2024 at 14:12
vishal singh
इतना डरावना लिखा है तो फिर भारत ने चंद्रमा पर मिशन क्यों किया? बेकार का खर्च।
जुलाई 26, 2024 at 16:52
mohit SINGH
ये सब लेख तो बस फेक न्यूज़ हैं! अंतरिक्ष में कोई भी चीज़ गिरती नहीं, वो सब अमेरिका का झूठ है ताकि हम डर जाएं और उनके नियम मान लें! 😈
जुलाई 27, 2024 at 06:15
Preyash Pandya
अरे भाई ये सब बकवास है! जब तक दुनिया के पास एक अंतरिक्ष पुलिस नहीं होगी, तब तक ये मलबा बढ़ता रहेगा! 🤡 और हां, भारत के चंद्रमा मिशन ने तो इसे और बढ़ा दिया! बहुत बढ़िया काम किया! 🙃
जुलाई 27, 2024 at 09:42
Raghav Suri
मुझे लगता है कि ये समस्या बहुत बड़ी है लेकिन उम्मीद है कि हम इसे सुलझा सकते हैं। जब हम अपने उपग्रहों को डिज़ाइन करते हैं, तो हमें उनके अंतिम दिनों के बारे में भी सोचना चाहिए। अगर हम उन्हें नियंत्रित तरीके से वापस ला सकें या उन्हें एक निश्चित गहराई में भेज सकें जहां वो कभी खतरा न बनें, तो ये बहुत अच्छा होगा। मैंने सुना है कि जापान के कुछ वैज्ञानिक ऐसे रोबोट बना रहे हैं जो अंतरिक्ष में फंसे हुए टुकड़ों को पकड़कर लाते हैं। ये बहुत दिलचस्प है। हमें भी इस तरह के प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना चाहिए। ये सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं, ये तो हमारी जिम्मेदारी है।
जुलाई 28, 2024 at 19:34
Priyanka R
अरे ये सब अमेरिका का नाटक है! वो अपने उपग्रह गिराकर हमें डराना चाहते हैं ताकि हम उनके नए डिफेंस सिस्टम खरीदें! 🕵️♀️ और जब तक NASA अपनी चीज़ें छिपाता रहेगा, तब तक कोई नहीं जानेगा कि क्या हो रहा है! अंतरिक्ष में असली खतरा तो वो है जो हम नहीं देख पाते!
जुलाई 30, 2024 at 14:37
Rakesh Varpe
उपग्रह गिरते हैं लेकिन ज्यादातर वायुमंडल में जल जाते हैं
जुलाई 31, 2024 at 11:29
Girish Sarda
मुझे लगता है कि हमें अंतरिक्ष मलबे के बारे में ज्यादा सोचना चाहिए क्योंकि ये एक ऐसी समस्या है जिसका असर भविष्य की पीढ़ियों को होगा और हम अभी इसकी अनदेखी कर रहे हैं
जुलाई 31, 2024 at 11:38
Garv Saxena
अरे भाई, हम इतने बड़े बनने की कोशिश कर रहे हैं कि अंतरिक्ष में भी कचरा छोड़ देते हैं। क्या हम वाकई खुद को देवता समझते हैं? या बस एक बड़ा बच्चा है जिसने अपने खिलौने फेंक दिए हैं? हम अंतरिक्ष को अपना बाग़ समझते हैं, लेकिन ये तो एक अनंत खाई है जिसे हम अपनी लालच के बर्तन से भर रहे हैं। अगर ये जारी रहा, तो शायद अगली पीढ़ी को अंतरिक्ष में तैरना पड़ेगा, न कि उड़ना।
अगस्त 1, 2024 at 23:08
Rajesh Khanna
हम अभी भी इस बात को नहीं समझ पा रहे कि अंतरिक्ष में भी हमें जिम्मेदारी लेनी होगी। लेकिन आशा है कि आगे बढ़कर हम सुधर जाएंगे।
अगस्त 2, 2024 at 15:05
Sinu Borah
अरे ये सब बकवास है! अंतरिक्ष में मलबा तो बढ़ेगा ही, क्योंकि हर देश अपना नाम दर्ज करवाना चाहता है! भारत का चंद्रमा मिशन? बस एक नाराज़गी का निशान है! अमेरिका ने क्या किया? चुपचाप बैठा रहा! जब तक हम एक देश के खिलाफ नहीं जाएंगे, तब तक कोई समाधान नहीं होगा!
अगस्त 3, 2024 at 10:31
Sujit Yadav
इस लेख में जो भी लिखा है, वो बहुत बेसिक है। अगर आपको लगता है कि ये समस्या सिर्फ टेक्नोलॉजी की है, तो आप बहुत अनभिज्ञ हैं। ये एक अंतरराष्ट्रीय नीति की विफलता है, जिसमें आपके जैसे लोग भी शामिल हैं जो बस फोन पर बातें करते हैं और अंतरिक्ष के बारे में ज्ञान रखने की कोशिश नहीं करते। 🤦♂️
अगस्त 3, 2024 at 11:59
Kairavi Behera
अगर आपके पास एक उपग्रह है जो खत्म हो गया है, तो उसे जमीन पर लाने का रास्ता बनाएं। ये बहुत आसान है। हम इसे अपने घर के कचरे की तरह नहीं फेंक सकते। एक छोटा सा नियम बना दें और सब ठीक हो जाएगा।
अगस्त 4, 2024 at 10:35
Aakash Parekh
इतना लिखा है, लेकिन कोई रियल डेटा नहीं। बस भावनाएं।
अगस्त 4, 2024 at 12:03
Sagar Bhagwat
अरे ये तो सच में बड़ी बात है, लेकिन जब तक हम अपने घर का कचरा नहीं संभालेंगे, तब तक अंतरिक्ष का कचरा कौन संभालेगा? 😄
अगस्त 4, 2024 at 13:39
Jitender Rautela
अरे ये सब तो बस एक बड़ा धोखा है! जब तक अमेरिका और चीन एक साथ नहीं आएंगे, तब तक ये मलबा बढ़ता रहेगा! हम बस देखते रह जाएंगे!
अगस्त 6, 2024 at 04:54
abhishek sharma
अंतरिक्ष मलबे का जो भी डर है, वो तो हमारे अपने दिमाग का बनाया हुआ है। जब तक हम अपने आप को बड़ा नहीं समझेंगे, तब तक ये सब बस एक ड्रामा होगा। अगर कोई टुकड़ा गिर जाए, तो क्या होगा? एक घर टूट जाएगा। लेकिन जितने लोग इस बारे में बात करते हैं, उतने ही लोग अपने घर के बाहर कचरा फेंकते हैं। ये तो हमारी आदत है।
अगस्त 6, 2024 at 10:22
Surender Sharma
उपग्रह गिरते हैं? अरे वो तो हर रोज़ होता है! लेकिन कोई नहीं बताता क्योंकि वो डरते हैं कि लोग डर जाएंगे! 😎
अगस्त 6, 2024 at 18:39
Divya Tiwari
हमारे देश ने अंतरिक्ष में जाने का नाम रखा है तो अब ये बातें करने की क्या जरूरत? अमेरिका जैसे देश तो अंतरिक्ष में नहीं जा पाए, हमने चाँद पर पैर रख दिया! इसलिए ये सब बकवास बंद करो!
अगस्त 6, 2024 at 23:28
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