बुधवार, 5 दिसंबर 2018 को डाबंग दिल्ली K.C. ने बेंगलुरु बुल्स को 32‑31 से पछाड़ा, और थियागराज इनडोर स्टेडियम में लाइव दर्शकों के बीच रोमांचक जीत हासिल की। यह मुकाबला 2018‑19 विवो प्रो कबड्डी लीग सीज़न 6 के मैच 97 में हुआ, जो इंटर‑ज़ोन चैलेंज सप्ताह का हिस्सा था।
मैच का त्वरित सारांश
सिर्फ एक पॉइंट के अंतर पर समाप्त हुआ यह टकराव, दोनों टीमों की तंग रैडिंग और टैक्लिंग लड़ाई का प्रतिबिंब था। डाबंग दिल्ली ने चौथे लगातार घरेलू जीत के साथ अपना होम स्ट्रिक बरकरार रखा, जबकि बेंगलुरु बुल्स की डिफेंस इस दिन बस पाँच टैकल पॉइंट ही जोड़ पाई।
- अंतिम स्कोर: डाबंग दिल्ली 32 – बेंगलुरु बुल्स 31
- स्थल: थियागराज इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली
- समय: 7:00 PM IST
- इंटर‑ज़ोन चैलेंज सप्ताह का 5वां मैच
मुख्य खिलाड़ी और आँकड़े
डाबंग दिल्ली की जीत का श्रेय दो रेडर को जाता है। चंद्रन रंजीत ने 9 रेड पॉइंट लिए, जबकि मेराज शेख ने 7 पॉइंट जोड़े। दोनों ने मिलकर 16 महत्वपूर्ण रैड बनाए, जो जीत का प्रमुख कारण बना।
बेंगलुरु बुल्स की ओर से रॉहित कुमार (कप्तान) ने 12 पॉइंट अर्जित किए, और पवन सहरावत ने 10 पॉइंट बनाए। हालांकि, उनका टैक्लिंग प्रदर्शन निचला रहा — केवल 5 टैकल पॉइंट। पूरे सीज़न में पवन सहरावत 271 पॉइंट के साथ टॉप स्कोरर बने, पर इस मैच में उनका प्रभाव सीमित रहा।
टैक्लिंग की कमी और रणनीतिक झलक
बेंगलुरु बुल्स की रक्षा आज का मुख्य कारण बन गई। टीम ने कुल 138 में से केवल 5 टैकल पॉइंट हासिल किए, जो औसत से बहुत नीचे था। विशेषज्ञों ने टिप्पणी की कि इस नुकसान के पीछे खिले हुए कोऑर्डिनेटर और रैडर के बीच तालमेल की कमी है। दूसरी ओर, डाबंग दिल्ली की टैक्लिंग लकीरें सुसंगत रही; उन्होंने 16 टैकल पॉइंट के साथ संतुलन बनाए रखा।
कोच संजय सिंह (डाबंग दिल्ली) ने पहले क्वार्टर में मैदान को खोलने के लिए तेज़ रैडिंग की रणनीति अपनाई, जिससे रक्षात्मक फॉर्मेशन को तोड़ा गया। बेंगलुरु की ओर से भी मैच के तीसरे क्वार्टर में एक बार फिर आक्रमण तेज किया गया, लेकिन टैक्लिंग में चूक ने उन्हें महँगा पड़ा।
इंटर‑ज़ोन चैलेंज सप्ताह का महत्व
प्रो कबड्डी लीग के इंटर‑ज़ोन चैलेंज सप्ताह में ज़ोन‑खास मैचों के अलावा, विभिन्न ज़ोन की टीमों के बीच दुर्लभ टकराव होते हैं। इस सप्ताह से दर्शकों को नई रणनीतियों और अप्रत्याशित परिणामों का आनंद मिलता है। इस मैच में डाबंग दिल्ली (उत्तर ज़ोन) और बेंगलुरु बुल्स (दक्षिण ज़ोन) की भिड़ंत ने ज़ोन‑विच अंतर को उजागर किया और लीग की प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊँचाई दी।
सीज़न के अंत में, बेंगलुरु बुल्स ने इस नुकसान को पीछे छोड़कर 5 जनवरी 2019 को गुज़रात फोर्टुनेजेंट्स को हराकर अपना पहला ट्रॉफी जीत लिया। इस जीत ने साबित किया कि एक झटका भी टीम को पूरी तरह से गिरा नहीं सकता — साहस और निरंतर सुधार ही जीत की कुंजी है।
सीज़न 6 का समापन और भविष्य की राह
2018‑19 प्रो कबड्डी लीग सीज़न ने 7 अक्टूबर 2018 से 5 जनवरी 2019 तक 12 टीमों के बीच 138 मैचों का रोमांचकारी सफ़र तय किया। मैशल स्पोर्ट्स ने लीग का संचालन किया, और स्टार स्पोर्ट्स ने इसे देश भर में लाइव प्रसारित किया। इस सीज़न में बेंगलुरु बुल्स के पवन सहरावत ने 209 सफल रैड के साथ सबसे अधिक सफल रैड भी दर्ज किए।
डाबंग दिल्ली की लगातार होम जीत ने दर्शकों को उम्मीद दिलाई कि वह अगले सीज़न में प्लेऑफ़ तक पहुंचने के योग्य बन सकेगा। अब सवाल यह है कि टीम अपने जॉन्स को कैसे बनाये रखेगी और टैक्लिंग को कैसे सुधारेगी, ताकि वे अगले साल का ट्रॉफी खींच सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डाबंग दिल्ली की इस जीत का उनके सीज़न में क्या महत्व है?
यह जीत टीम की होम स्ट्रिक को चार लगातार जीत तक ले गई, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और प्लेऑफ़ में जगह बनाने के संभावनाएं मजबूत हुईं। विशेषकर टैक्लिंग में सुधार ने उनका गेम प्लान संतुलित किया।
बेंगलुरु बुल्स ने केवल पाँच टैकल पॉइंट क्यों हासिल किए?
मैच के दौरान कई प्रमुख टैक्लर चोटिल हो गए, और रैडर के तेज़ फुटेज ने उनकी रक्षा को ध्वस्त कर दिया। कोऑर्डिनेशन की कमी और डाबंग की आक्रामक रैडिंग भी कारण रहे।
इंटर‑ज़ोन चैलेंज सप्ताह का प्रो कबड्डी लीग पर क्या असर है?
इस सप्ताह के मैच विभिन्न ज़ोन की टीमों को मिलाते हैं, जिससे रणनीति में नई चुनौतियां आती हैं और दर्शकों को विविधता का आनंद मिलता है। यह लीग की प्रतिस्पर्धा को और तीव्र बनाता है।
पवन सहरावत ने इस सीज़न में कितने पॉइंट स्कोर किए?
पवन सहरावत ने 271 पॉइंट जुटाए, जिससे वह सीज़न के टॉप स्कोरर बनें। उनकी 209 सफल रैड ने बेंगलुरु बुल्स को कई मोड़ पर बचाया।
अगले सीज़न में डाबंग दिल्ली को कौन सी प्रमुख चुनौती का सामना करना पड़ेगा?
डाबंग को टैक्लिंग को मजबूत करना होगा, क्योंकि इस जीत में उनकी रैडिंग बेहतर थी, पर टैक्लिंग में अभी भी सुधार की गुंजाइश है। साथ ही, प्लेऑफ़ के दबाव में कबड्डी को संभालना एक बड़ी चुनौती होगी।
टिप्पणि
Kanhaiya Singh
डाबंग दिल्ली की इस जीत से टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है; लगातार चार घर की जीत ने प्लेऑफ़ के लिए एक मजबूत आधार रखा है।
अक्तूबर 17, 2025 at 20:10
prabin khadgi
सच्चाई यह है कि इस मैच में डाबंग की तेज़ रैडिंग ने बेंगलुरु की टैक्लिंग गड़बड़ी को सामने ला दिया, जिससे स्कोर का अंतर सिर्फ एक पॉइंट रहा। कोच संजय सिंह ने शुरुआती क्वार्टर में आक्रमण को तेज़ी से शुरू कर दिया, जिससे विरोधी का ब्लॉक टूट गया। बेंगलुरु का टैक्लिंग प्रतिशत इस सीज़न के औसत से बहुत नीचे रहा, यही कारण है कि उन्होंने केवल पाँच टैक्ल पॉइंट ही जोड़े। यदि उनके टैक्लर चोटिल नहीं होते, तो परिणाम पूरी तरह बदल सकता था। इसलिए टीम प्रबंधन को टैक्लिंग को प्राथमिकता देना चाहिए।
अक्तूबर 18, 2025 at 23:56
Aman Saifi
सिर्फ रैडिंग नहीं, बल्कि टैक्लिंग की निरंतरता भी जीत की कुंजी है; बेंगलुरु को इस बात को समझना होगा। टीम को चोटिल टैक्लर को जल्दी से फिट करना चाहिए, जिससे रैडर को पीछे नहीं देखना पड़े। इसके अलावा, कोऑर्डिनेटर को रैडर की गति के साथ तालमेल बिठाना चाहिए, ताकि टैक्लिंग के मौके बढ़ें। अंतिम परिणाम में यह छोटे‑छोटे सुधार बड़े बदलाव ला सकते हैं।
अक्तूबर 20, 2025 at 03:43
Ashutosh Sharma
क्या कहें, डाबंग दिल्ली ने फिर से साबित कर दिया कि प्रीफ्रंट में तेज़ रैडिंग और बैक में कमजोर टैक्लिंग का मिश्रण कभी नहीं टूटता।
बेंगलुरु बुल्स की रणनीति को देख कर लगता है कि उन्होंने अपने कोऑर्डिनेटर्स को भी गुप्त मिशन भेजा था कि कैसे टैक्लिंग में लापरवाही दिखाएँ।
हर पारी में चंद्रन रंजीत ने नौ पॉइंट लेकर रैडिंग का शेर बना दिया, जबकि मेराज शेख ने सात पॉइंट से उस सिंगार को दोबारा सजाया।
वहीं बेंगलुरु की ओर से रॉहित कुमार ने बारह पॉइंट तो जुटाए, पर टैक्लिंग में केवल पाँच पॉइंट इसको बचाने को काफी नहीं थे।
इस मैच में टैक्लिंग की कमी ने बेंगलुरु को पछाड़ने का काम आसान बना दिया, जैसे की कोई लड़का धूप में बिखरी शरबत पी रहा हो।
विशेषज्ञों ने कहा कि टैक्लर की चोट और रैडर की तेज़ी के बीच तालमेल नहीं बना, और यही मुख्य कारण बना।
डाबंग का कोच संजय सिंह ने तुरंत रैडिंग पर बल दिया, जिससे विरोधी की रक्षा पूरी तरह टूट गई।
बेंगलुरु ने तीसरे क्वार्टर में फिर से आक्रमण तेज किया, पर टैक्लिंग की खामियों ने मुँह में पानी लाया।
यह देखना दिलचस्प है कि कैसे एक छोटा सा टैक्ल पॉइंट अंतर पूरे मैच का मूड बदल देता है।
फ़िफ़्टी फोर मिनट में जब डाबंग ने अंतिम रैड सफल किया, तो पूरे स्टेडियम में ध्वनि गूंज उठी।
बेंगलुरु के फ़ैंस ने यह मान लिया कि उन्होंने बहुत सारा दिल लगा दिया, पर परिणाम का सच्चा दर्पण नहीं दिखा।
इस जीत से डाबंग को आगे के प्लेऑफ़ में आत्मविश्वास मिला है, पर उन्हें टैक्लिंग को और सुदृढ़ करना पड़ेगा।
बेंगलुरु के पवन साहरावत ने इस सीज़न में टॉप स्कोरर का खिताब जीता, पर इस मैच में उनका प्रभाव कम रहा।
यदि बेंगलुरु अगले महीने की मैच में टैक्लिंग में सुधार कर ले, तो वे फिर से शीर्ष पर आ सकते हैं।
अंत में कहा जाए तो कबड्डी का असली मज़ा वही है जब दोनों टीमों की रैडिंग और टैक्लिंग बराबर हो, तभी दर्शकों को सच्ची रोमांच मिलती है।
अक्तूबर 21, 2025 at 07:30
Rana Ranjit
डाबंग दिल्ली की लगातार जीत एक सामाजिक प्रतीक बन रही है; यह दर्शाता है कि निरंतर मेहनत और टीम भावना से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। इस जीत ने दिल्ली के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा दी है और कबड्डी को मुख्यधारा में लाने में मदद करेगी। बेंगलुरु की हार ने भी उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करने का अवसर दिया है, जो दीर्घकालिक विकास के लिए फायदेमंद है।
अक्तूबर 22, 2025 at 11:16
Arundhati Barman Roy
बिल िकुल सही कहा आपने, लेकिन खास कर टैक्लिंग में सुधार की ज़रूरत है।
अक्तूबर 23, 2025 at 15:03
yogesh jassal
डाबंग की इस जीत पर बधाई! ये देख कर दिल खुश हो जाता है कि टीम ने अंत तक हार नहीं मानी। बेंगलुरु ने तो पूरा हौसला दिखाया, बस टैक्लिंग में थोड़ा लापरवाह रहे। अगले सीज़न में अगर दोनों टीमें इस तरह रैडिंग-टैक्लिंग का संतुलन रखें तो दर्शकों को और भी रोमांच मिलेगा। आशा है सभी खिलाड़ी अपनी-अपनी कमियों को सुधार कर आगे बढ़ेंगे।
अक्तूबर 24, 2025 at 18:50
Raj Chumi
अरे यार, टैक्लिंग को भूल गए क्या? पूरी टीम का दिल तोड़ दिया!
अक्तूबर 25, 2025 at 22:36
mohit singhal
दिल्ली की जीत का मतलब है हमारी शक्ति का अभिप्रेत दिखा! 💪🏽🔥
अक्तूबर 27, 2025 at 01:23
pradeep sathe
बहुत सही कहा, ऐसी जीत से धैर्य और उत्साह दोनों बढ़ते हैं।
अक्तूबर 28, 2025 at 05:10
ARIJIT MANDAL
टैक्लिंग की कमी ही बेंगलुरु की हार का मुख्य कारण था। अगली बार रणनीति बदलनी पड़ेगी।
अक्तूबर 29, 2025 at 08:56
Bikkey Munda
बेंगलुरु को टैक्लिंग के लिए विशेष ड्रिल्स और कोऑर्डिनेशन सत्रों की जरूरत है। ट्रेनिंग में रैडर और टैक्लर के बीच तालमेल बढ़ाने पर ज़ोर दें।
अक्तूबर 30, 2025 at 12:43
akash anand
डाबंग दिल्ली की जीत ने यह सिद्ध किया कि निरन्तर अभ्यास और रणनीतिक योजना से किसी भी टीम को मात दी जा सकती है। बेंगलुरु को अब अपनी टैक्लिंग क्षमताओं को पुनर्स्थापित करने के लिये गंभीरता से काम करना चाहिए।
अक्तूबर 31, 2025 at 16:30
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